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कोरोना महामारी के बचाव में ग्राम पंचायत की भूमिका


कृषि, पशुपालन एवं कृषि प्रसंस्करण लद्यु उद्योग से जीवन स्तर में सुधार

रबी फसल की कटाई का कार्य ग्राम पंचायत एवं गांवों में पूरा हो गया है। 3 से 5 ग्राम पंचायत के बीच स्थित कृषि उपज मंडियों के माध्यम से सरकार द्वारा निधार्रित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने का कार्य किया जा रहा है ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि उक्त संदर्भ में गांव के आम ग्रामीण किसानों की उपज का सही वास्तविक मूल्य प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हंै। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर कृषि प्रसंस्करण लघु वन उपज के माध्यम से लोगों को रोजगार प्रदान करने का कार्य भी पंचायतें कर सकती हंै। स्वयं सहायता समूह, युवा समूह को भी स्किल डवलपमेंट के तहत प्रशिक्षण प्रदान कर गांव में ही मोबाइल रिपेयर, कम्यूटर शिक्षण, होटल प्रबंधन एवं व्यवसायिक शिक्षा के माध्यम से आजीविका बढ़ाकर लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया जा सकता है।
कृषि के साथ ही पशुपालन ग्रामीण जीवन की महत्वपूर्ण आजीविका का स्त्रोत है। राजस्थान में पशुधन बहुतायात उपलब्ध है जिसमे भेड़पालन, बकरी, गाय, भैस, ऊंट के अलावा अन्य पशुओं का भी खेती के अलावा डेयरी एवं अन्य उद्योगों के द्वारा रोजगार एवं आजीविका के लिए पंचायत जीपीडीपी की आयोजना में सम्मलित कर सकती है। केंद्र एवं राज्य सरकार की शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाडी सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए ग्राम पंचायत को प्रति परिवार को वास्तविक स्थिति का डाटा संधारण करना आवश्यक है तभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश एवं विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मूल्यों वाली जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों के लिए कोविड महामारी में ग्राम पंचायत स्तर पर आम ग्रामीणों के जीवन की रक्षा, सुरक्षा एवं पोषण पहला कर्तव्य होना चाहिए। महात्मा गांधी के अनुसार गांव के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी पंचायतों की है। विकेन्द्रीकरण व्यवस्था में वंचित, दूरस्थ, दलित एवं भिन्न क्षमतावानों तक इस कठिन परीक्षा की घड़ी में ग्राम पंचायतों को अपनी महत्ती भूमिका साबित करनी होगी। पंचायत के कौन से गांव के किस वार्ड में किस घर की क्या आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति है इसका पूरा-पूरा ज्ञान स्थानीय स्तर पर चुने हुए वार्डपंच एवं सरपंचों को होता ही है। राजस्थान देश का पहला प्रदेश है जहां से प्रथम प्रधानमंत्री ने पंचायती राज की नींव 2 अक्टूबर 1959 में रखी। सन् 1960 से अब तक कुल 11 बार पंचायत के चुनाव हुए। 73वें संविधान संशोधन के पश्चात जनवरी एवं फरवरी 2020 में सम्पन ग्राम पंचायत के चुनाव में जीत कर आए जनप्रतिनिधि छठी पीढी के जनप्रतिनिधि है। राजस्थान में लगभग 6000 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच एवं वार्डपंच निर्वाचित हुए हैं। जिसमें आधे से अधिक महिला जनप्रतिनिधि पंचायतों में बखूबी नेतृत्व ले रही हैं। लेकिन लगभग 4000 से अधिक ग्राम पंचायतों में चुनाव होना शेष है। उस स्थिति में निवर्तमान जनप्रतिनिधियों को ही पंचायत की जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। लॉकडाउन के प्रथम एवं द्वितीय चरण में ग्राम पंचायतों ने कोरोना महामारी के खिलाफ जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य सेवाओं, मास्क, सेनेटाईजर, खाद्यान सुरक्षा एवं शासन एवं प्रशासन के साथ मिलकर टीम भावना के साथ लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का कार्य किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के कुछ वास्तविक अनुभव इस प्रकार है।

लॉकडाउन का तृतीय चरण ग्राम पंचायतों के लिए बहुत अधिक चुनौतीभरा रहेगा

राजस्थान देश का ऐसा प्रदेश है जहां की संख्या का एक बड़ा भाग आजीविका के लिए अन्य राज्यों में अपने कौशल, क्षमता, स्कील, योग्यता एवं श्रम के बलबूते पर लौहा मनवाता रहा है। आसाम, बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, कनार्टका एवं तमिलनाडु आदि राज्यों की सकल घरेलु आय में प्रवासी राजस्थानियों का बहुत बड़ा योगदान है। कोरोना महामारी की इस संकट की घड़ी में प्रवासी राजस्थानी वापस अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि, गांव, अपनों के मध्य आने को आतुर है। अत: पंचायतों का भी नैतिक दायित्व बनता है कि वे प्रवासियों को आदर एवं सत्कार के साथ पुन: स्वीकार करें एवं राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा जारी स्वास्थ्य से संबंधित दिशा निर्देशों का अवश्य पालन किया जाए। ग्राम पंचायतें समय पर प्रशासन को सूचित कर क्वाराइंटन सेंटर एवं आईसोलेशन की विशेष व्यवस्था में मदद करनी चाहिए।
स्वच्छ, स्वस्थ्य, सुखद एवं सुनहरें भविष्य की दिशा में सभी की भागीदारी से बने आत्मनिर्भरता का प्लान
ग्राम पंचायतों द्वारा प्रतिवर्ष अप्रेल से मार्च तक के एक साल की समयावधि हेतु ग्राम पंचायत विकास नियोजन (जीपीड़ीपी) का प्लान तैयार किया जाता है। नए जनप्रतिनिधियों को प्राथमिकता से कोविड जैसी महामारी के लघु एवं दीर्घकालीन प्रभावों को ध्यान में रखते हुए आगामी आयोजना को जनता की भागीदारी से पूरक प्लान एवं पूरक बजट तैयार करने की रूपरेखा को अंजाम देना होगा।

खाद्यान की दृष्टि से पंचायत का प्रत्येक परिवार आत्मनिर्भर बने

खाद्यान सुरक्षा: गांव स्तर पर आज भी भामाशाह एवं आम नागरिकों द्वारा आस-पड़ोस के सुख-दुख में भागीदारी की परम्परा रही है। लॉकडाउन के तृतीय चरण में लंबे समय तक बहुत अधिक परिवारों को भोजन उपलब्ध करना चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। अत: ग्राम पंचायतों द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदान की जाने वाले राशन को तत्काल प्रभाव से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य जिम्मेदारी के साथ करना होगा। इसी के साथ ही किसी भी व्यक्ति की भूख से मृत्यु न हो, अत: ग्राम पंचायत द्वारा फूड स्टाम्प के तहत भी तुरंत अनाज उपलब्ध कराना चाहिए। इसके साथ ही सुक्ष्म नियोजन के तहत वृद्व, वंचित, दलित, अन्तोदय एवं दुरस्थ पहाड़ी एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों में बसे परिवारों हेतु विशेष ध्यान देना होगा। पंचायत स्तर पर जन भागीदारी एवं सामुहिक सहयोग से अनाज बंैक इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

निरोगी राजस्थान:स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता

ग्राम पंचायत स्तर पर आज भी स्वास्थ्य सेवाओं का आधारभूत ढांचा बहुत कमजोर है। 2 से 3 ग्राम पंचायत के बीच के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की उपलब्धता पाई गई है जिसमें भी डॉक्टर विशेषकर महिला डॉक्टर का अभाव रहा है। कोविड की इस महामारी से पूर्व ही राज्य सरकार ने निरोगी राजस्थान का संदेश देकर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को दूरस्थ करने का बीडा उठाया था। कोविड के परिणामस्वरूप ही वर्तमान में सरकार ने डॉक्टर, नर्स एवं तकनीकी स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों को भरने का कार्य किया है। सरकार एवं प्रशासन से निवेदन रहेगा की ग्राम पंचायत स्तर पर डॉक्टर एवं एएनएम के पदों को प्राथमिकता से पहले भरा जाए  क्योंकि आज भी एक एएनएम के पास 3 से 4 ग्राम पंचायत का कार्यभार रहता है उस स्थिति गुणात्मक सेवाएं गांव के दुरस्थ स्थानों तक नहीं पहुंच पाती। इस महामारी से लडऩे हेतु ग्राम पंचायतों को भी पहली प्राथमिकता में स्वास्थ सेवाओं में आधारभूत विकास के लिए ग्राम पंचायत विकास नियोजन पब्लिक हैल्थ सेंटर के भवन, स्वास्थ्य सेवाओं को लेना ही होगा तभी ग्राम पंचायत के लोग निरोगी रहते हुए न केवल पंचायत, बल्कि राज्य एवं देश की तरक्की में योगदान प्रदान कर सकेंगे।

निरोगी राजस्थान: पोषण एवं टीकाकरण

कोविड की इस महामारी में सबसे अधिक गर्भवती एवं धात्री माताओं को चुनौती का सामना करना पड़ा। महामारी से लडऩे के लिए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर की ओपीडी सेवाएं निरस्त होने से महिलाओं को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ ग्राम पंचायत को भी दीर्घकालीन नीति के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला को ट्रेक करने के लिए पंचायत स्तर पर गोद भराई कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं का उत्साहवर्धक एवं सम्मान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही गर्भधारण से लेकर जच्चा एवं बच्चे के सभी टीके समय पर लगे इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य विशेषकर आयु वर्ग के अनुसार आयरन एवं विटामिन की गोलियों की उपलब्धता एवं समुचित मूल्यांकन आवश्यक है। लॉकडाउन के समय भी किशोरियों को सेनेटरी नेपकिन की अनुपलब्धता से परेशान हुई।

निरोगी राजस्थान: गांव के वृद्वजनों के हितों की पहल

स्वस्थ्य समाज के लिए आवश्यक है कि ग्राम पंचायत बुजुर्ग एवं क्रोनिकल बीमारियां यथा मधुमेह, हदय रोग, किडनी रोग से पीडि़त नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं के उपचार हेतु आयोजना तैयार करें। आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में वृद्वावस्था में भी आम व्यक्ति तनाव मुक्त जीवन कैसे व्यापन करे एवं पंचायत वृद्वजनों के हितों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए।

जल प्रबंधन, जल संरक्षण, जल स्वावलबन

कोविड के तृतीय चरण में भूख से ज्यादा चुनौतीपूर्ण मुद्दा शुद्व पेयजल रहेगा। मई एवं जून की भंयकर गर्मी में गुजरात की सीमा से लगी हुई सिरोही के रेवदर ब्लॉक की रायपुर ग्राम पंचायत हो या मध्यप्रदेश की सीमा से बारां जिले के शाहाबाद ब्लॉक की कस्बा थाना ग्राम पंचायत तक अंतिम छोर तक पेयजल हेतु शुद्व पानी पहुंचाना चुनौतीभरा कार्य है। दीर्घकालीन नीति के तहत राज्य सरकारों को भी प्राथमिकता से जल जीवन मिशन के तहत दुरस्थ पंचायतों में पहले पानी पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी। लेकिन लद्यु नीति के अंतर्गत ग्राम पंचायत को तत्काल प्रभाव से टेंकर के माध्यम से पंचायत के सबसे अंतिम गांव, ढाणी एवं बस्ती तक पानी उपलब्ध करवाने की आयोजना तैयार करनी चाहिए। ग्राम पंचायतों का जल स्वावलम्बन के अंतर्गत पंचायत में ही नाडी निर्माण, तालाब, कुआ, तालाबों का गहरीकरण, एनिकट निर्माण, गांव का पानी गांव में एवं खेत का पानी खेत में रोकने का प्रयास करना होगा। तभी गांव एवं पंचायत पानी की दृष्टि से आत्मनिर्भर बन सकेगी। 

प्रत्येक परिवार को आवास: प्रधानमंत्री आवास योजना

कोविड की इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को ग्रामीण स्तर पर प्रत्येक परिवार को आवास योजना के तहत अधिक से अधिक परिवारों का चयन कर पंचायत की आयोजना में सम्मलित करना चाहिए। इससे न केवल परिवार के लिए स्थाई सम्पति का निर्माण होगा बल्कि उन्हें नरेगा के कन्र्वेजेन्स प्लान के तहत लेबर के रूप में कार्य करने का अवसर भी मिलेगा। अत: प्राथमिकता के क्रम में ग्राम पंचायतों को अधिक से अधिक वंचित परिवरों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलवाना चाहिए।

ग्रामीण आजीविका की जीवन रेखा: महात्मा गांधी नरेगा

मोडिफाइड लॉकडाउन के द्वितीय चरण से राजस्थान में ग्रामीण स्तर पर महात्मा गांधी नरेगा में 21 अप्रेल से कार्य आरम्भ किया गया। अभी लगभग 1100000 लोग नरेगा श्रमिक के रूप में ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत हंै। गांव के आम कृषि श्रमिक, देहाडी मजदूर एवं काम मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार प्रदान करने का प्रावधान है। पंचायतों को जल प्रबंधन, संरक्षण एवं स्वावलंबन के साथ की खेत की मेडबंदी, पशु केटलशैड, वन संरक्षण, एनिकट के अलावा व्यक्तिगत एवं सामुदायिक परिसम्पतियों के सर्जन के अधिक से अधिक प्रस्ताव लेने चाहिए। इससे न केवल ग्राम पंचायत के आम नागरिक को कोविड के संकट में रोजगार मिलेगा बल्कि नरेगा में केटेगरी बी के तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक सम्पतियों का निर्माण भी होगा।  
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