24 घंटे में 2400 से ज्यादा मामले


Lockdown के 39वें दिन कोरोना संक्रमण के मामलों में बड़ा उछाल, 24 घंटे में 2400 से ज्यादा मामले

नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या शनिवार को बढकऱ 1,223 हो गई जबकि संक्रमितों का आंकड़ा भी 37,776 पर पहुंच गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 71 लोगों की मौत हुई और 2,411 नए मामले सामने आए। मंत्रालय ने बताया कि देश में अभी इस महामारी से संक्रमित 26,565 मरीजों का इलाज चल रहा है और 10,017 लोग स्वस्थ हो गए हैं। एक मरीज देश से बाहर चला गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘अब तक 26.52 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।’’ इन मामलों में कुल 111 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस वायरस से शुक्रवार शाम से शनिवार तक 24 घंटों में 71 मौतों हुईं। इनमें महाराष्ट्र में 26, गुजरात से 22, मध्य प्रदेश से आठ, राजस्थान से चार, कर्नाटक में तीन, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश में दो-दो और बिहार, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु से एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। इस वायरस से अब तक सबसे अधिक लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई है। महाराष्ट्र में 485 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद गुजरात में 236, मध्य प्रदेश में 145, राजस्थान में 62, दिल्ली में 61, उत्तर प्रदेश में 43 और पश्चिम बंगाल एवं आंध्र प्रदेश में 33-33 लोगों की मौत हुई है। तमिलनाडु में मृतकों की संख्या 28 है, तेलंगाना में 26 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कर्नाटक में इस महामारी से 25 मरीजों की मौत हुई है। पंजाब में 20 लोगों को इस महामारी से जान गंवानी पड़ी है जबकि जम्मू कश्मीर में आठ, केरल तथा हरियाणा में चार-चार तथा झारखंड एवं बिहार में तीन-तीन लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मेघालय, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और असम में एक-एक मरीज की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे अधिक 11,506 मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं। इसके बाद गुजरात में 4,721, दिल्ली में 3,738 और मध्य प्रदेश में 2,719 मामले हैं। राजस्थान में 2,666 मामले सामने आए हैं। तमिलनाडु में 2,526 और उत्तर प्रदेश में 2,455 मामले हैं। आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के मामलों की संख्या 1,525 है जबकि तेलंगाना में 1,057 मामले हैं। पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 795, पंजाब में 772, जम्मू-कश्मीर में 639, कर्नाटक में 598, केरल में 498 और बिहार में 471 है।

राहुल गांधी ने आरोग्य सेतु ऐप पर सवाल उठाया 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि ‘आरोग्य सेतु’ ऐप एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है जिससे निजता एवं डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो रही हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ''आरोग्य सेतु एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है जिसे एक निजी ऑपरेटर को आउटसोर्स किया गया है तथा इसमें कोई संस्थागत जांच-परख नहीं है। इससे डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं।’’ गांधी ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी हमें सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है, लेकिन नागरिकों की सहमति के बिना उन पर नजर रखने का डर नहीं होना चाहिए।’’ इससे पहले कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ‘आरोग्य सेतु’ से जुड़े एक सवाल पर वीडियो लिंक के जरिए संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरोग्य सेतु के संदर्भ में कई विशेषज्ञों ने निजता का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस इस विषय पर विचार कर रही है और अगले 24 घंटे में समग्र प्रतिक्रिया देगी।’’ गौरतलब है कि सरकार ने कोरोना संक्रमण को ट्रैक करने के लिए आरोग्य सेतु ऐप की शुरुआत की है। खबरों के मुताबिक इस ऐप को करोड़ों लोग डाउनलोड कर चुके हैं।

खुली बिक्री योजना से अनाज खरीदें राज्य

केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के दायरे में नहीं आने वाले लॉकडाऊन से प्रभावित गरीबों को खाद्यान्न सुलभ कराने के लिए खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) से अनाज लें। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने शनिवार को मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। मौजूदा समय में, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएस) के तहत राशन की दुकानों के माध्यम से बेचे जाने वाले सब्सिडीप्राप्त खाद्यान्नों के लिए 81 करोड़ से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हैं। खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत, फिलहाल केंद्र सरकार 22 रुपये प्रति किलो की दर से चावल और 21 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं प्रदान करती है। पासवान ने एक बयान में कहा, ‘‘मैंने सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर के परिवारों की खाद्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए ओएमएसएस के तहत खाद्यान्न का उठाने के बारे में लिखा है।’’ खाद्य मंत्रालय ने ‘लॉकडाऊन’ से प्रभावित लोगों के बीच खाद्य पदार्थो को बांटने के लिए सक्रिय कार्यकताओं और संगठनों को ओएमएसएस के तहत खाद्यान्न खरीदने की अनुमति दी हुई है। राज्य सरकारें भी गरीबों की खाद्य मांग को पूरा करने के लिए ओएमएसएस के तहत खाद्यान्न खरीद कर सकती हैं। कोविड-19 रोग के प्रसार को रोकने के लिए 24 मार्च से देशव्यापी ‘लॉकडाऊन’ लागू है। गरीबों की मांग को पूरा करने के लिए सरकार के अपने गोदामों में पर्याप्त खाद्य आपूर्ति होने की बात कहते हुए पासवान ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास एक मई को कुल 605.7 लाख टन खाद्यान्न भंडार था, जिसमें 275.7 लाख टन चावल और 330 लाख टन गेहूं शामिल है। उन्होंने कहा कि एनएफएसए और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत पीडीएस वितरण के लिए मासिक खाद्यान्न की आवश्यकता लगभग 60 लाख टन की है। पासवान ने कहा कि एफसीआई ने 24 मार्च को लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से लगभग 192 लाख टन खाद्यान्न का परिवहन किया है। जिसमें से 126.12 लाख टन सडक़ और समुद्री मार्ग से भेजा गया, जबकि बाकी 65.4 लाख टन 2,334 रैक में रेल के जरिए पहुंचाए गए। इस अवधि में लगभग 5.63 लाख टन अनाज पूर्वोत्तर के क्षेत्र में ले जाया गया। प्रधानमंत्री गरीब योजना (पीएमजीएवाई) के तहत खाद्यान्नों और दालों के मुफ्त वितरण के बारे में, पासवान ने कहा कि इस योजना के तहत खाद्यान्नों की आवश्यकता लगभग 104.4 लाख टन चावल और 15.6 लाख टन गेहूं की है। जिसमें से अब तक 56.7 लाख टन चावल और 7.7 लाख टन गेहूं विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और गुजरात जैसे छह राज्यों ने गेहूं वितरित किया है, जबकि अन्य राज्यों ने पीएमजीएवाई के तहत चावल वितरित किया है। दालों के मामले में, पीएमजीएवाई के तहत तीन महीनों के लिए लगभग 5.82 लाख टन दाल की आवश्यकता होती है, जिसमें से अभी तक 1.90 लाख टन दाल भेजे जा चुके हैं। इसमें से 1.15 लाख टन दालें राज्यों में पहुंच गई हैं और 38,098 टन दालों का वितरण किया गया है। पीएमजीएवाई के तहत, सरकार लॉकडाउन के दौरान किसी भी गरीब को भूख की स्थिति से बचाने के मकसद से तीन महीने के लिए प्रति पीडीएस लाभार्थी को पांच किलोग्राम अनाज और प्रति परिवार एक किलो दलहन वितरित कर रही है। यह वितरण, एनएफएसए के तहत आवंटन के ऊपर और अधिक है। मंत्री ने कहा कि सरकार के पास 30 अप्रैल तक 12.54 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है। इसमें 5.16 लाख टन अरहर दाल, 1.26 लाख टन मूंग, 2.55 लाख टन उड़द, 2.72 लाख टन चना और 0.84 लाख टन मसूर दाल शामिल है। पासवान ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरों और काले बाजारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त शक्ति दी गई है।

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