कोविड-19 के खिलाफ जारी लड़ाई में जगी नई उम्मीद, इन नई दवाइयों से हारेगा कोरोना!


COVID-19 के खिलाफ जारी लड़ाई में जगी नई उम्मीद, इन नई दवाइयों से हारेगा कोरोना!

नई दिल्ली . कोविड-19 रोगियों को एचआईवी-रोधी दवा के संयोजन के लिए अस्पताल को रोगी से लिखित सूचित सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। साथ ही, ऐसे रोगियों को केस-टू-केस आधार पर इस प्रोटोकॉल में शामिल किया जाएगा। एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले लोपिनवीर और रटनवीर दोनों दवाओं के संयोजन का उपयोग कोविड-19 मरीजों के लिए करने की अनुमति मिल गई। स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए भारत की सर्वोच्च निकाय, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ढ्ढष्टरूक्र) ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिसमें कहा गया है कि दवा के संयोजन का उपयोग अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकता है। जिससे एक उम्मीद की नई किरण जगी है।
आईसीएमआर ने एक दर्जन से अधिक अन्य दवाओं की पहचान की है, जिसमें रेमेड्सविर (मूल रूप से इबोला के इलाज में प्रयोग) माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (मूल रूप से कुष्ठ रोग के इलाज में प्रयोग) शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इसके अलावा डिसुल्फिरम (शराब निर्भरता के उपचार के लिए दवा) और रेसवेराट्रॉल (अंगूर से एक प्राकृतिक यौगिक जो दिल और अन्य बीमारियों के लिए नैदानिक ??परीक्षणों के तहत है), जिसका उपयोग कोविड -19 के इलाज के लिए किया जा सकता है।
कोविड-19 रोगियों को एचआईवी-रोधी दवा के संयोजन के लिए अस्पताल को रोगी से लिखित सूचित सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। साथ ही, ऐसे रोगियों को केस-टू-केस आधार पर इस प्रोटोकॉल में शामिल किया जाएगा। अस्पतालों को क्लिनिकल, प्रयोगशाला, साथ ही सुरक्षा परिणामों के बारे में विश्वसनीय डेटा उत्पन्न करने के लिए रोगियों की बारीकी से निगरानी करनी होगी।
कुछ मामलों में उपचार के परिणाम आने के बाद ही भविष्य में कोविड-19 मामलों के नैदानिक प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करने में सहायक साबित होंगे। 
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