सोशल मीडिया से : छोटी-छोटी बातें

सोशल मीडिया से : छोटी-छोटी बातें
  • एक बच्चा मां के पास आया और बोला, ‘मां आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो।’
मां ने पूछा, ‘क्यों’
बच्चा : ‘आज आप गुस्से में नहीं हो।’
आशय इतना ही है कि गुस्सा एक अस्थायी भाव और सनकीपन है। साथ ही यह भी कि सुंदरता कोई  दुर्लभ गुण नहीं है। गुस्सा न करना भी हमें सुंदर बना देता है।
  • उपजाऊ 
एक अमीर किसान ने अपने बेटे को कहा कि वह हर रोज खेत में आकर काम किया करे। किसान के दोस्त ने कहा कि तुम्हें अपने बेटे से हर रोज इतना काम नहीं करवाना चाहिए। फसल तो अच्छी हो ही जाएगी। 
किसान ने कहा, ‘मैं फसल उपजाऊ नहीं कर रहा, अपना बेटा तैयार कर रहा हूं।’ 
अर्थ यह है कि बच्चे का सही विकास हो इसके लिए जरूरी है कि उसे कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार किया जाए। मेहनत और अभ्यास से ही व्यक्ति खुद को उपयोगी बनाए रख सकता है।  
सजग
  • एक दुकान पर हमेशा रोशनी रहती थी। एक ने पूछा, ‘तुम कौन-से ब्रांड का बल्ब इस्तेमाल करते हो ये तो बहुत लंबे समय तक जलते रहते हैं।’
दुकानदार ने कहा, ‘बल्ब तो जल्दी ही बुझ जाते हैं। पर जैसे ही बल्ब बुझता है, हम नया लगा देते हैं।’ 
आशय यह है कि हमेशा चमक रखनी है तो अपने संसाधनों का भी ध्यान रखना होगा। छोटी-छोटी खराबियों और दोषों को सही समय पर दूर करना होगा।
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